Camera ki avishkar kisne ki.
आजकल कैमेरा सभी के हाथों में आ गया है। हम कैमेरे का प्रयोग तो रोज ही करते हैं परंतु अपने मोबाईल फोन से हमें अपने फोन के बारे में तो पता ही होता है परंतु हमें ये भी पता होता है कि हमारा कैमेरा कितने पिक्सल का है ।
हम जब शादी ,किसी पार्टी या किसी फंक्शन में जाते हैं तो हमे एक बड़ा सा कैमेरा पकड़े एक व्यक्ति दिखाई देता है जो बहुत ही हमारी अहम यादों को उस कैमेरे में कैद कर लेता है ।
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| best camera dslr |
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| camera history |
DSLR CAMERA एक बहुत ही अच्छा और बड़ा कैमेरा होता है हमारे मोबाईल से भी बड़ा। हमारे जहन में ये बात जरूर आती होगी कि इसकी पूरी परिभाषा आखिर है क्या। हम दोस्तों इस आर्टिकल में ये तो जानेंगे ही कि DSLR CAMERA की फूल फोर्म या परिभाषा क्या होती है बल्कि इससे जुड़े हुए कुछ और जरूरी तथ्यों के बारे में भी जानेगें।
DSLR CAMERA -DIGITAL SINGLE LENSE REFLEX CAMERA
एक अच्छे DSLR CAMERA की किमत कितनी होती है - यूं तो सस्ते से सस्ते कैमेरा की किमत बहुत ही कम हो सकती है परंतु सबको एक अच्छी डील ही चाहिए होती है तो हम बताते हैं कि एक अच्छा DSLR CAMERA 50000 से शुरू हो जाता है । और बहुत ही अच्छी क्वालिटी का आपको मिल जाता है ।
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| best dslr camera photo |
पहले जब इस सिद्धांत पर फोटो बनाए जाते थे तो एक कमरा होता था जसमे बाहर की तरफ एक छेद हुआ करता था जिसमे रोशनी आती थी छेद जितना छोटा होता था फोटो उतनी ही अच्छी आती थी।
लेकिन अंधेरा बहुत होता था ।तो समस्या से छुटकारा पाने के लिए बहुत से सुधार किए गए और कैमेरे का इवोल्यूशन शुरू हो गया ।
सबसे पहला फोटो 1816 में निपसे ने निकाली थी।वही कड़ी मेहनत और लगन के साथ सर जोसेफ ने पहला कैमरा बनाया था।
अब हम बात करते हैं आज के DSLR CAMERA की जिसके कुछ जरूरी हिस्से होते हैं ।
जैसे-
1-अपर्चर
2-शटरस्पिड
3-आई एस ओ
आइए कैमेरे के ने हिस्से को थोड़ा जान लेते हैं जो फोटो खिचता है।
अपर्चर- ये लेंस का जो होल होता है ये उसका साईज होता है ।अगर ये ज्यादा बड़ा होगा तो रोशनी ज्यादा आयेगी तो फोटो अलग तरह की आयेगी पिछे की चीजें कम दिखेंगी और एक ही जगह ज्यादा फोकस होगा।
शटरस्पिड- हमारे कैमेरा में एक शट्टर होता है हमारे कैमेरे में ये शटर खुलता और बंद होता है इसके खुलने और बंद होने पर हि फोटो बनता है ।इसे ही शटरस्पिड कहते हैं।ये कुछ संकेंड्स की या सेकेंड्स के कुछ हिस्से की होती है ।जैसे 1/100,1/50और बहुत सी होती हैं।
आई एस ओ- ये आपके कैमेरे की ईमेज सेंस्टीविटी को डिफाइन करता है।कि आपका इमेज सेंसर कितना सेस्टीव है जब आप इमेज लेते हैं।तो जितना कम आई एस ओ न0 होगा उतना कम सेंसटीव आपका इमेज सेंसर होगा।
सबसे पहले जब फोटो को निकालते थे तो सिल्वर क्लोराइड का पेपर लिया जाता था और फोटो बनाया जाता था उसमें पाया गया की बनी हुई फोटो बहुत ही जल्दी फेड हो जाती थी।इसका समाधान निकालने के लिए सिल्वर क्लोराइड को नयी चीज से बदल दिया । जिसे बेक्यूमिन कहा जाता था। तब जाकर ये फेड होने वाली समस्या खत्म हो गयी ।
पर समस्या यहीं खत्म नहीं हुई फोटो आने का टाइम घंटो होता था परंतु इस समस्या के समाधान के लिए मर्करी फ्य़ूम्स का प्रयोग किया गय़ा जिससे फोटो घंटो में न आकर कुछ ही मिनटों में आने लगी ।
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| dslr camera photo |
अब पूरी दुनिया में फोटोग्राफी पर रिसर्च होने लगे थे और कोडेक कंपनी ने फोटोग्राफी की दुनिया में एक क्रांति भी ला दि थी। अब दुनिया कलर फोटो ग्राफी की तरह चलने को थी ।रोल फिल्मस मार्केट में आ चुके थे जो बहुत ही अच्छी क्वालिटि की फोटो आपको देते थे।
फिर क्या था फोटोग्रीफी की कंपनियों में एक होड़ सी मच गई । जिससे नए नए आविष्कार हुए और SLR कैमेरा का निर्माण हुआ ।इस कैमेरे में पोलेरोइड लगी होती थी जो फोटो खिंचकर कुछ मिनटो में ही फोटो दे देता था। पर ये कैमेरा महंगा बहुत था आम लोगों की पहुंच से कुछ ज्यादा ही दूर था ।
फिर सर्किटों के बहुत सस्ते कांपोनेंटस ने ये असंभव काम भी संभव बना दिया 1975 में डिजीटल कैमेरा लांच होने लग गए। और हमारा पहला डिजीटल कैमेरा कोडेक कंपनी ने दिया। अब ये बहुत महंगे और हाई क्वालिटी के ईमेज हमे दे देते हैं।
तो दोस्तों कैसा लगा ये आर्टिकल हमें कमेंट करके जरूर बताएँ।





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